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आज के दौर में प्रेम विवाह करना आसान लगता है, लेकिन इसे सफल बनाना कई बार मुश्किल हो जाता है। कई युवक-युवतियाँ सच्चा प्रेम करते हैं, लेकिन परिवार की असहमति, कुंडली दोष, सामाजिक दबाव या अचानक आई रुकावटों के कारण विवाह में दिक्कतें आ जाती हैं।
“प्रेम विवाह के उपाय” सिर्फ टोटके नहीं हैं। सबसे जरूरी है पहले यह समझना कि बाधा क्यों आ रही है, फिर उसी के अनुसार ज्योतिष और व्यवहार के उपाय अपनाना चाहिए।
यह लेख 15 साल से ज्यादा के अनुभव पर आधारित है, जिसमें कई प्रेम विवाह मामलों में ग्रहों की स्थिति, दशा-अंतर्दशा और पारिवारिक ऊर्जा का विश्लेषण कर समाधान बताए गए हैं।
हर प्रेम संबंध में समस्या केवल बाहरी कारणों से नहीं होती। कई बार जन्म कुंडली में कुछ विशेष ग्रह स्थितियाँ विवाह में देरी या विरोध उत्पन्न करती हैं।
अक्सर देखे जाने वाले कारण इस प्रकार होते हैं:
* मंगल दोष (विशेषकर 7वें या 8वें भाव में)
* शनि की दृष्टि विवाह भाव पर
* राहु का प्रभाव प्रेम संबंधों पर
* कमजोर शुक्र ग्रह
* वर्तमान दशा का प्रतिकूल होना
यदि 7वां भाव (विवाह का भाव) शनि या राहु से प्रभावित हो, तो परिवार की असहमति या सामाजिक बाधा आ सकती है। यदि शुक्र कमजोर हो, तो प्रेम संबंध स्थिर नहीं रहता।
इसलिए बिना वजह जाने सिर्फ टोटके करने से स्थायी समाधान नहीं मिलता।
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ज्योतिष में प्रेम विवाह योग स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। यदि 5वां भाव (प्रेम) और 7वां भाव (विवाह) आपस में जुड़े हों, तो प्रेम विवाह की संभावना मजबूत होती है।
उदाहरण के लिए:
यदि 5वें भाव का स्वामी 7वें भाव में हो या दोनों के बीच दृष्टि संबंध हो, तो प्रेम विवाह का योग बनता है। शुक्र और मंगल का संतुलित संबंध भी आकर्षण को विवाह तक ले जाता है।
लेकिन अगर यह योग शनि या राहु से प्रभावित हो, तो प्रेम तो होता है, लेकिन विवाह में रुकावट आ सकती है।
ऐसी स्थिति में उपाय ग्रहों के संतुलन के हिसाब से करने चाहिए।
परिवार की सहमति न मिलना सबसे बड़ी परेशानी होती है। कई बार माता-पिता का विरोध भी ग्रहों की स्थिति से जुड़ा होता है।
यदि शनि चौथे भाव (माता-पिता) को प्रभावित कर रहा हो, तो जिद और असहमति बढ़ सकती है। राहु भी भ्रम और सामाजिक डर उत्पन्न करता है।
ऐसी स्थिति में सबसे पहले अपने व्यवहार में सुधार लाना जरूरी है। ज्योतिषीय उपाय तभी असर करते हैं जब व्यवहार में भी संतुलन हो।
परिवार की सहमति के लिए निम्न आध्यात्मिक उपाय लाभकारी माने जाते हैं:
* सोमवार को शिव मंदिर में जल अर्पित करना
* “ॐ नमः शिवाय” का 108 बार जप
* माता-पिता के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लेना
* गुरुवार को पीले वस्त्र धारण करना
यह सिर्फ धार्मिक क्रिया नहीं है, बल्कि ऊर्जा को संतुलित करने का तरीका भी है।
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मंगल दोष प्रेम विवाह में देरी या संघर्ष का बड़ा कारण बन सकता है। अगर मंगल 7वें भाव में हो या चंद्र से अशुभ संबंध बनाए, तो रिश्ते में गुस्सा और टकराव बढ़ सकता है।
लेकिन हर मंगल दोष खतरनाक नहीं होता। कई बार लोग बिना सही जानकारी के डर जाते हैं।
मंगल दोष की स्थिति में कोशिश करें कि मंगल की ऊर्जा को सही दिशा में लगाएं।
मंगल संतुलन के लिए:
* मंगलवार को हनुमान चालीसा का पाठ
* लाल मसूर का दान
* गुस्से पर नियंत्रण
इन उपायों का मकसद ग्रह की ऊर्जा को संतुलित करना है, सिर्फ डर दूर करना नहीं।
कई लोग पूछते हैं, “प्रेम विवाह कब होगा?” इसका जवाब सिर्फ सामान्य उपायों से नहीं मिल सकता।
विवाह का सही समय दशा-अंतर्दशा से निर्धारित होता है। यदि शुक्र, 7वें भाव का स्वामी या गुरु की दशा चल रही हो, तो विवाह की संभावना बढ़ जाती है।
अगर अभी समय अनुकूल नहीं है, तो उपायों का मकसद समय को बेहतर बनाना और रुकावटें कम करना होता है।
इसलिए समय का सही विश्लेषण बहुत जरूरी है।
राहु भ्रम और अचानक होने वाली घटनाओं का कारण होता है। अगर राहु 5वें भाव में हो, तो प्रेम संबंध अचानक शुरू होकर अचानक खत्म भी हो सकते हैं।
राहु की स्थिति में व्यक्ति को अक्सर भावनात्मक अस्थिरता महसूस होती है।
राहु के संतुलन के लिए:
* शनिवार को सरसों का तेल दान
* ध्यान और संयम का अभ्यास
* नकारात्मक संगति से दूरी
राहु के उपायों का मकसद भ्रम दूर करना और मन को साफ रखना है।
कई वेबसाइटें “100% गारंटी” वाले उपाय बताती हैं, लेकिन असलियत कुछ और होती है।
प्रेम विवाह में सफलता तीन चीजों पर निर्भर करती है:
1. ग्रह स्थिति
2. व्यक्तिगत प्रयास
3. परिवारिक संवाद
अगर सिर्फ उपाय किए जाएं और व्यवहार में सुधार न हो, तो नतीजे स्थायी नहीं रहते।
ज्योतिष सिर्फ मार्गदर्शन देता है, लेकिन फैसला और कोशिश व्यक्ति को खुद करनी होती है।
15 साल से ज्यादा के अनुभव में देखा गया है कि जब कोई सही समय पर संयम रखता है और उपायों को अनुशासन से करता है, तो हालात धीरे-धीरे बदलते हैं।
कई बार ऐसा हुआ है कि जहां परिवार पूरी तरह विरोध में था, वहां कुछ महीनों में सोच बदल गई। इसका कारण सिर्फ मंत्र नहीं था, बल्कि ग्रह दशा का अनुकूल होना और व्यवहार में बदलाव भी था।
इसलिए प्रेम विवाह के उपाय हमेशा संतुलित सोच के साथ करने चाहिए।
प्रेम विवाह सिर्फ भावना नहीं, बल्कि जिम्मेदारी भी है। अगर विवाह में रुकावट आ रही है, तो पहले उसका कारण समझें।
जन्म कुंडली में:
* 5वां भाव (प्रेम)
* 7वां भाव (विवाह)
* शुक्र और मंगल
* शनि और राहु
इनका संतुलन देखना जरूरी है।
उपाय तभी सफल होते हैं जब वे व्यक्ति की कुंडली के हिसाब से किए जाएं।
अंत में यह समझना जरूरी है कि प्रेम विवाह के उपाय कोई चमत्कार नहीं हैं, बल्कि यह ऊर्जा को संतुलित करने की प्रक्रिया है। धैर्य, सम्मान और सही समय का इंतजार करना ही सबसे बड़ा उपाय है।
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