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लेखक: ज्योतिषाचार्य अनिल आचार्य | AstroAmbe, सूरत | अनुभव: 15+ वर्ष | परामर्श: 5,000+ केस
क्या आपकी दूसरी शादी में बाधा आ रही है?
हर बार रिश्ता बनता है और फिर टूट जाता है।
पहली शादी टूट चुकी है और दूसरी शादी की राह नहीं मिल रही है।
यह स्थिति बहुत कठिन होती है — भावनात्मक रूप से भी, और सामाजिक रूप से भी।
वैदिक ज्योतिष में इस समस्या का एक स्पष्ट कारण होता है, और जब कारण स्पष्ट हो, तो उपाय भी संभव है।
इस लेख में मैं आपको बताऊंगा:
कुंडली में दूसरी शादी क्यों रुकती है
कौन-से ग्रह दूसरी शादी में बाधा बनते हैं
किस दशा में दूसरी शादी का योग बनता है
महिला, विधवा, और तलाकशुदा व्यक्ति के लिए अलग-अलग उपाय
सिद्ध मंत्र और व्रत जो वास्तव में काम करते हैं
मेरे अनुभव से दो वास्तविक केस स्टडी
पहली शादी का टूटना या दूसरी शादी में देरी — यह कोई दुर्भाग्य नहीं है।
यह आपकी कुंडली में कुछ विशेष ग्रह स्थितियों का परिणाम है।
वैदिक ज्योतिष में विवाह और दांपत्य जीवन के लिए मुख्यतः तीन भाव महत्वपूर्ण होते हैं:
सप्तम भाव (7th House) — विवाह, जीवनसाथी, और दांपत्य सुख का भाव।
द्वितीय भाव (2nd House) — परिवार और दूसरे विवाह का भाव।
एकादश भाव (11th House) — लाभ और इच्छापूर्ति का भाव। जब शुक्र यहाँ हो, तो दूसरी शादी की संभावना बढ़ती है।
इन तीनों भावों की स्थिति, उनके स्वामी ग्रह, और उन पर पड़ने वाले दृष्टि-प्रभाव — यही तय करते हैं कि दूसरी शादी होगी या नहीं, और कब होगी।
मेरे 15 वर्षों के अनुभव और हजारों कुंडलियों के विश्लेषण के आधार पर, दूसरी शादी के ये प्रमुख योग होते हैं:
1. सप्तम भाव में पाप ग्रह
जब सप्तम भाव में मंगल, शनि, राहु, या केतु स्थित हो, तो पहली शादी कमजोर होती है।
यह स्थिति दूसरी शादी की ओर इशारा करती है।
2. सप्तमेश (7th Lord) की कमजोर स्थिति
यदि सप्तम भाव का स्वामी ग्रह षष्ठ (6th), अष्टम (8th), या द्वादश (12th) भाव में हो, तो विवाह में बाधा आती है।
तलाक और दांपत्य समस्याओं के पीछे यही योग सबसे अधिक देखा जाता है।
3. शुक्र की कमजोर या नीच स्थिति
शुक्र प्रेम और विवाह का कारक ग्रह है।
शुक्र यदि नीच राशि (कन्या) में हो, या पाप ग्रहों से दृष्ट हो, तो विवाह में बार-बार बाधा आती है।
4. राहु का प्रभाव
राहु जब लग्न, सप्तम भाव, या शुक्र के साथ हो — तो दो विवाह का योग बनता है।
वशीकरण और नकारात्मक शक्तियों के कारण भी राहु सक्रिय होकर विवाह में बाधा डालता है।
5. द्वितीय भाव पर पाप ग्रह की दृष्टि
द्वितीय भाव पर यदि शनि या मंगल की दृष्टि हो और सप्तम भाव भी कमजोर हो, तो पहली शादी के बाद दूसरी शादी अनिवार्य हो जाती है।
6. नवमांश कुंडली का विश्लेषण
केवल जन्म कुंडली पर्याप्त नहीं है।
नवमांश कुंडली (D9) में यदि सप्तम भाव पाप ग्रहों से पीड़ित हो, तो दूसरी शादी की पुष्टि होती है।
दूसरी शादी तब होती है जब सही योग + सही दशा एक साथ आते हैं।
राहु दशा
राहु दशा या राहु की अंतर्दशा में दूसरी शादी के योग सबसे अधिक सक्रिय होते हैं।
राहु परिवर्तन का ग्रह है। यह पुराने रिश्ते को तोड़कर नई शुरुआत करवाता है।
शुक्र दशा
शुक्र विवाह का कारक है। शुक्र की महादशा या अंतर्दशा में नई प्रेम स्थिति और दूसरी शादी का योग बनता है।
यदि शुक्र कुंडली में बली हो, तो यह दशा बहुत शुभ होती है।
गुरु दशा
गुरु (बृहस्पति) विवाह में शुभता लाता है।
यदि सप्तम भाव पर गुरु की दृष्टि हो और गुरु की दशा चल रही हो, तो दूसरी शादी इसी दौरान होती है।
महत्वपूर्ण: दशा का विश्लेषण हमेशा जन्म कुंडली, नवमांश कुंडली, और गोचर के आधार पर एक साथ करना चाहिए। बिना कुंडली देखे दशा काल बताना संभव नहीं है।
हर ग्रह दोष के लिए अलग उपाय होता है और सही उपाय वही है जो आपके दोष के अनुसार हो।
शुक्र आधारित उपाय
शुक्र कमजोर हो, नीच राशि में हो, या पाप ग्रह से पीड़ित हो — तो ये उपाय करें:
उपाय 1 — शुक्रवार का व्रत
हर शुक्रवार सूर्योदय से पहले स्नान करें।
सफेद वस्त्र पहनें।
माँ लक्ष्मी की पूजा करें और सफेद मिठाई अर्पित करें।
यह व्रत 21 शुक्रवार तक करें।
उपाय 2 — शुक्र मंत्र जाप
हर शुक्रवार सुबह इस मंत्र का 108 बार जाप करें:
ॐ शुक्राय नमः
जाप के लिए सफेद चंदन की माला का उपयोग करें।
उपाय 3 — सफेद वस्तुओं का दान
शुक्रवार को गाय को सफेद चीजें खिलाएं — चीनी, चावल, सफेद मिठाई।
किसी कन्या को सफेद वस्त्र या चांदी की कोई वस्तु दान करें।
राहु दोष के उपाय
जब राहु सप्तम भाव में हो या शुक्र के साथ हो:
उपाय 1 — राहु कवच पाठ
शनिवार को राहु कवच या राहु स्तोत्र का पाठ करें।
उपाय 2 — नीलम या गोमेद रत्न
राहु के लिए गोमेद रत्न लाभकारी होता है।
लेकिन रत्न धारण करने से पहले कुंडली विश्लेषण अनिवार्य है।
गलत रत्न स्थिति को बिगाड़ सकता है।
उपाय 3 — नारियल का उपाय
किसी बहती नदी में नारियल प्रवाहित करें।
यह राहु के नकारात्मक प्रभाव को कम करता है।
शनि दोष के उपाय
जब शनि सप्तम भाव में हो या सप्तमेश को पीड़ित करे:
उपाय 1 — शनिवार का व्रत
शनिवार को उपवास रखें।
काली उड़द दाल, तिल और काले तिल का दीपक जलाएं।
उपाय 2 — शनि मंत्र
ॐ शं शनैश्चराय नमः
इसे 108 बार शनिवार सुबह जपें।
उपाय 3 — पीपल की पूजा
शनिवार को पीपल के वृक्ष की जड़ में सरसों का तेल चढ़ाएं।
गुरु (बृहस्पति) को मजबूत करने के उपाय
गुरु कमजोर हो तो दूसरी शादी के अवसर बार-बार चूकते हैं:
उपाय 1 — गुरुवार का व्रत
गुरुवार को पीले वस्त्र पहनें।
केले के पेड़ की जड़ में पानी चढ़ाएं।
बृहस्पति देव का ध्यान करें।
उपाय 2 — गुरु मंत्र
ॐ गुरवे नमः या ॐ बृहस्पतये नमः
केले के पेड़ के पास 108 बार जाप करें। यह 12 गुरुवार तक करें।
उपाय 3 — पीली वस्तुओं का दान
गुरुवार को हल्दी, पीली दाल, पीले फल, या पीले वस्त्र किसी ब्राह्मण या गरीब को दान करें।
महिलाओं के लिए विशेष उपाय
प्रेम विवाह और विवाह संबंधी समस्याओं में महिलाओं की कुंडली में शुक्र और गुरु दोनों का बली होना जरूरी है।
उपाय 1 — गौरी पूजन
सोमवार को माँ पार्वती की पूजा करें।
सफेद फूल, सफेद मिठाई और दूध अर्पित करें।
16 सोमवार तक यह व्रत करें।
उपाय 2 — मंगला गौरी व्रत
सावन के हर मंगलवार को मंगला गौरी व्रत करें।
यह स्त्री के विवाह की बाधाओं को दूर करने का सबसे सिद्ध उपाय है।
उपाय 3 — कात्यायनी मंत्र
ॐ कात्यायनाय विद्महे कन्याकुमारी धीमहि, तन्नो दुर्गिः प्रचोदयात्
यह मंत्र विशेषतः विवाह में बाधा आने पर जपा जाता है।
हर दिन 108 बार, 40 दिन तक।
विधवा की कुंडली में अष्टम भाव (8th House) और उस पर पाप ग्रहों का प्रभाव देखा जाता है।
उपाय 1 — दुर्गा पाठ
हर शुक्रवार को दुर्गा सप्तशती का पाठ करें या करवाएं।
उपाय 2 — मंगल दोष निवारण
यदि कुंडली में मंगल दोष हो, तो मंगल शांति पूजा करवाएं।
मंगल दोष का निवारण होने से दूसरी शादी के रास्ते खुलते हैं।
उपाय 3 — विष्णु सहस्रनाम पाठ
गुरुवार को विष्णु सहस्रनाम का पाठ करने से गुरु ग्रह मजबूत होता है।
गुरु मजबूत होने से शुभ जीवनसाथी मिलने के योग बनते हैं।
तलाक के बाद दूसरी शादी में कई बार कुंडली में वही दोष फिर से सक्रिय होते हैं जिनकी वजह से पहली शादी टूटी।
इसलिए उपाय शुरू करने से पहले कुंडली का पूरा विश्लेषण जरूरी है।
उपाय 1 — सप्तम भाव की शांति
किसी सिद्ध ज्योतिषी से सप्तम भाव शांति पूजा करवाएं।
यह पूजा शुक्रवार या गुरुवार को करवानी चाहिए।
उपाय 2 — महामृत्युंजय मंत्र
यह मंत्र हर नकारात्मक ग्रह स्थिति को शांत करता है:
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्।।
इसे 21 दिन तक, प्रतिदिन 108 बार जपें।
उपाय 3 — ग्रह गोचर का सही समय देखना
दूसरी शादी तभी होती है जब गोचर में भी शुभ ग्रह सप्तम भाव पर दृष्टि डाल रहे हों।
गुरु का सप्तम भाव पर गोचर एक अत्यंत शुभ संकेत होता है।
यह समस्या भी बहुत सामान्य है।
यदि आपके पति दूसरी शादी करना चाहते हैं या किसी और की ओर आकर्षित हो रहे हैं, तो वशीकरण और प्रेम समस्या के उपाय भी इस स्थिति में काम आते हैं।
लेकिन इससे पहले कुंडली मिलान और दांपत्य दोष का विश्लेषण जरूरी है।
उपाय 1 — पति की कुंडली का विश्लेषण
जांचें कि क्या पति की कुंडली में दूसरी शादी का योग वास्तव में है।
यदि नहीं है, तो उचित उपाय से स्थिति सुधारी जा सकती है।
उपाय 2 — दांपत्य संबंध मजबूत करने का उपाय
हर सोमवार को शिव-पार्वती की पूजा करें।
दोनों की साथ में पूजा करने से दांपत्य में प्रेम और विश्वास बढ़ता है।
उपाय 3 — परामर्श
कुंडली में यदि सच में दूसरी शादी का योग हो, तो टकराव से बेहतर ज्योतिषीय परामर्श लेना होता है।
इसमें दोनों की कुंडलियाँ एक साथ देखी जाती हैं।
(नामऔरविवरणगोपनीयरखेगएहैं।)
एक 34 वर्षीय महिला, सूरत से, 2018 में तलाक के बाद मेरे पास आईं।
दूसरी शादी के लिए 7-8 रिश्ते आए, लेकिन हर बार आखिरी समय पर टूट जाते।
कुंडली विश्लेषण:
उनकी कुंडली में सप्तम भाव में राहु था।
शुक्र कन्या राशि में नीच था — यह विवाह में बाधा का सबसे बड़ा कारण था।
नवमांश में भी सप्तम भाव पर शनि की दृष्टि थी।
उपाय:
21 शुक्रवार का शुक्र व्रत।
शुक्र मंत्र — ॐ शुक्राय नमः — 108 बार प्रतिदिन।
मंगला गौरी व्रत।
राहु शांति के लिए नारियल नदी में प्रवाहित करना।
परिणाम:
लगभग 9 महीने बाद एक अच्छा रिश्ता आया। शुक्र की दशा के प्रारंभ के साथ ही दूसरी शादी हुई।
(नामऔरविवरणगोपनीयरखेगएहैं।)
एक 42 वर्षीय पुरुष, गुजरात से।
पत्नी का देहांत 2019 में हुआ था।
परिवार के दबाव में 2021 से दूसरी शादी की कोशिश कर रहे थे। लेकिन हर रिश्ता किसी न किसी कारण से नहीं हो पाया।
कुंडली विश्लेषण:
सप्तम भाव पर शनि की दृष्टि थी।
अष्टम भाव में मंगल था — जो पहली पत्नी के अल्पायु योग की पुष्टि भी कर रहा था।
गुरु कुंडली में कमजोर था।
गुरु की दशा तो चल रही थी, लेकिन गुरु स्वयं पीड़ित था — इसीलिए लाभ नहीं मिल रहा था।
उपाय:
12 गुरुवार का गुरु व्रत।
गुरु मंत्र — ॐ बृहस्पतये नमः — 108 बार प्रतिदिन।
पीले वस्त्र और हल्दी का दान।
महामृत्युंजय मंत्र का 21 दिन जाप।
परिणाम:
लगभग 11 महीने बाद, गुरु के गोचर के दौरान दूसरी शादी हुई।
बाजार में बहुत से टोटके और उपाय मिलते हैं।
लेकिन हर उपाय हर कुंडली के लिए सही नहीं होता।
गलत उपाय करने से स्थिति और बिगड़ सकती है।
इसलिए मेरी सलाह है:
पहले अपनी जन्म कुंडली और नवमांश कुंडली का सही विश्लेषण करवाएं।
जानें कि आपकी कुंडली में कौन-सा ग्रह दोष है।
उसी के अनुसार उपाय करें।
मैं 15 वर्षों से इस प्रकार के जटिल विवाह योगों का विश्लेषण करता आया हूं।
यदि आप व्यक्तिगत परामर्श चाहते हैं, तो अभी संपर्क करें।
या WhatsApp पर सीधे संदेश करें: +91 9586284891
प्रश्न 1: क्या हर कुंडली में दूसरी शादी का योग होता है?
नहीं। दूसरी शादी का योग तभी होता है जब सप्तम भाव, सप्तमेश, या शुक्र पर विशेष पाप ग्रहों का प्रभाव हो। हर कुंडली में यह स्थिति नहीं होती।
प्रश्न 2: दूसरी शादी के उपाय कितने दिनों में असर दिखाते हैं?
उपाय आमतौर पर 6 से 12 महीनों में असर दिखाते हैं। यह आपकी कुंडली में चल रही दशा और गोचर पर निर्भर करता है। जब दशा और उपाय दोनों साथ हों, तो परिणाम जल्दी आते हैं।
प्रश्न 3: विधवा महिला की दूसरी शादी के लिए कौन-सा उपाय सबसे प्रभावशाली है?
मंगला गौरी व्रत और दुर्गा सप्तशती पाठ सबसे प्रभावशाली उपाय हैं। इसके साथ मंगल दोष निवारण भी जरूरी है।
प्रश्न 4: क्या दूसरी शादी रोकी जा सकती है यदि कुंडली में उसका योग हो?
ज्योतिष योग संभावना दर्शाता है, निश्चितता नहीं। कुंडली में दोष के उपाय और सही दांपत्य व्यवहार से योग को कमजोर किया जा सकता है।
प्रश्न 5: पति दूसरी शादी करना चाहे तो क्या उपाय करें?
पहले पति की कुंडली का विश्लेषण करवाएं। यदि सच में योग नहीं है तो उचित शांति उपाय से संबंध सुधारे जा सकते हैं। शिव-पार्वती की सोमवार पूजा इसमें सबसे सहायक है।
प्रश्न 6: क्या ऑनलाइन ज्योतिष परामर्श से दूसरी शादी के उपाय मिल सकते हैं?
हाँ। जन्म तिथि, जन्म समय, और जन्म स्थान की सही जानकारी के आधार पर ऑनलाइन कुंडली विश्लेषण पूरी तरह संभव है। मैं भी व्यक्तिगत ऑनलाइन परामर्श देता हूँ।
प्रश्न 7: दूसरी शादी के लिए कौन-सा मंत्र सबसे जल्दी काम करता है?
कात्यायनी मंत्र और शुक्र मंत्र विवाह की बाधाओं के लिए सबसे प्रभावशाली हैं। लेकिन मंत्र का चुनाव हमेशा आपकी कुंडली में मौजूद दोष के अनुसार होना चाहिए।
दूसरी शादी में बाधा एक वास्तविक ज्योतिषीय समस्या है।
इसका समाधान टोटकों से नहीं, बल्कि कुंडली की सही समझ और उचित उपायों से होता है।
शुक्र, राहु, शनि, या गुरु — जो भी ग्रह आपकी कुंडली में दोष दे रहा है, उसकी शांति से रास्ता खुलता है।
यदि आप चाहते हैं कि मैं व्यक्तिगत रूप से आपकी कुंडली देखूं और सटीक उपाय बताऊं:
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